४ डिब्बे पहले हो..... कूदना , या शश श करके ....बातें करना
अब अपन का दिन मिसळ पाव से शुरू ....और पावभाजी पे ख़तम
चिपचिपाती गर्मी हो या ....झमझमाती बरसात
हर ान ुभव एक नया सा है
ज़िंदादिली का दूसरा नाम है मुंबई
अबकी तो मटकी भी फोड़े , बप्पा का स्वागत भी किया
कहते हैं "सिटी नेवर स्लीप्स "
सही कहते हैं
जब सपने हों हज़ार, तो नींद का कैसे आये विचार
सब तरफ है दौड़, हर तरफ है दौड़,
पर ज़िन्दगी भी तो दौड़ ही है
यहाँ बस .....ज़रा तेज़ भागती है
जो हाथ सीट के लिए धक्का देते हैं ,
वही बहार लटकने पर संभाल भी लेते हैं
दिन की भगदड़ के बाद लोकल के अनजान चेहरों में
बिना नाम की कुछ मुस्कानें सुकून देती है
कुछ दुआ सलाम होती है,
थक हार के समंदर किनारे बैठो
तो जैसे शोर में ......एक अलग ख़ामोशी होती है
लहरें जैसे कुछ कान में चुपके से कहती हैं
मैं भी उस वक़्त को सोच के मुस्कुरा देता हूँ
जब शहर के साथ पहली थी मुलाकात
लगता है जैसे कल की ही हो बात
और अब कोई पुरानी दोस्ती लगती है
कुछ तो है शहर में बात, जो अजनबी को बनाये ख़ास
हर एक को अपने में समां के, रखती है दिल के पास
तो भाई चलो .....अब आ गया मलाड ,
बाकी की कहानी कल सुनाएंगे भैय्या
अब हम भी हो गए बम्बैय्या
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