Tuesday, April 01, 2008
Books...my life
किताबें ज़िंदगी के न जाने कितने पहलुओं को दिखाती हैं...जो शायद इतने काम समयमें देख पाना मुनासिब न हो...एक दोस्त जो हर वक्त में आप के साथ है...सुख-दुख,हार-जीत,आंसू-हंसी,सच-झूठ,अच्छाई-बुराई,ऊँच-नीच,नफरत-मोहब्बत सब इनके दामन में मिलेंगे...इसी दुनिया के सारे एहसासों का आइना होते हुए भी जिनका अलग ही संसार है...जो मोती पसंद हैं चुन लो...जो नही छोड़ दो...जब कोई पहलू महसूस किया हुआ हो तो वो तो खास हो ही जाता है...जो न भी हो ...वो भी इतनी खूबसूरती के साथ बयां किया जाता है...की महसूस किये बिना नही रहा जाता...कहते हैं..." अंदाजे बयां बदल देता है हर बात...जहाँमें कोई बात नयी तो नही"...ये सारे वही धूप-छाँव होते हैं...जिनमें हम चलते रहते हैं...कुछ को पहचानते हैं...कुछ अनजाने अनछुए ही रह जाते हैं...जब प्रेमचंद बयां करते हैं ...की कैसे हामिद ...एक ५ साल का बच्चा...अपनी खुशी भूल कर ...दादी के जलते हाथों को बचाने के लिए चिमटा खरीद कर लाता है...या फाउंटेन हेड ...में रोअर्क ...दुनिया भूल कर अपनी सोच के हिसाब से चलता है...किसके मन में इन नायकों के लिए प्यार,सम्मान नही आता...या मधुशाला में बच्चन उड़ेल कर रख देते हैं ...अपनी मन की हाला...और हर एक चीज़ में ...जब होती है उनकी मधुशाला...कौन नही नमन करेगा...उस महाकवि को इस सोच के लिए...या जब बशीर साहब, या दुष्यंत कुमार हिला कर रख देते हैं अपने शेरों और ग़ज़लों से ...या जब चेतन भगत के उपन्यास के काल्पनिक पात्र...में हम अपना अक्स देखते हैं...बहुत ही प्यारा तोहफा है...खुदा की तरफ से...(बाकी अगले अंश में )...
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